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1990 में आतंकियों ने मंदिर को किया था ध्वस्त, 36 साल बाद रामनवमी पर खुला ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर, जल्द ही होगा जय श्री राम का जयघोष...

Aryan
27 March 2026 11:19 AM IST
1990 में आतंकियों ने मंदिर को किया था ध्वस्त, 36 साल बाद रामनवमी पर खुला ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर, जल्द ही होगा जय श्री राम का जयघोष...
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रघुनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि मंदिर की मूर्तियों को कोलकाता से मंगवा लिया गया है और आने वाले महीनों में उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार स्थापित किया जाएगा

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर रघुनाथ मंदिर में 36 साल बाद रौनक लौटी है। 36 साल में पहली बार है जब यहां रामनवमी का आयोजन हो रहा है। फतेहकदल में झेलम नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक श्री रघुनाथ मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाया गया है। यहां घंटे- घड़ियाल बजे, मंत्रों का उच्चारण हुआ और भजन गूंजे। हवन हुआ और पूरा माहौल सुगंधित हो गया। 1990 में आतंकियों ने रघुनाथ मंदिर पर हमला बोला था, मंदिर को तबाह कर दिया था। कश्मीर पंडितों का पलायन हुआ और यह मंदिर तब से वीरान हो गया था। बीते 36 साल से इस मंदिर में सन्नाटा बिखरा था।

मुस्लिम परिवारों ने दिया पूजा का सामान

रघुनाथ मंदिर समिति ने राम नवमी पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस आयोजन की सबसे अच्छी बात यह रही कि पूजा के लिए जरूरी सामग्री जैसे चावल, लकड़ियां और फूल सब मंदिर के आस-पास रहने वाले स्थानीय मुस्लिम परिवारों द्वारा ही जुटाई गई थी। उद्घाटन समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए, जो आपसी अपनेपन और एकता को दर्शाता है।

1835 में रघुनाथ मंदिर का निर्माण हुआ था

झेलम नदी के किनारे स्थित इस भव्य रघुनाथ मंदिर का निर्माण 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने करवाया था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत राज्य के पूंजीगत व्यय (CAPEX) से 1 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर फरवरी 2025 में इसका जीर्णोद्धार कराया था।

कोलकाता से मंगवाई गईं मंदिर की मूर्तियां

रघुनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि मंदिर की मूर्तियों को कोलकाता से मंगवा लिया गया है और आने वाले महीनों में उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार स्थापित किया जाएगा।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का मकसद

जानकारी के अनुसार, कश्मीर घाटी में कुल 952 मंदिर हैं, जिनमें से केवल 212 ही चालू अवस्था में थे। अब सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और 'विश्वास बहाली' (Confidence Building) के उपाय के तहत घाटी के 15 अन्य पुराने मंदिरों का भी रेनोवेशन कर रही है, ताकि विस्थापित कश्मीरी पंडित अपनी मातृभूमि लौट सकें।

कश्मीरी पंडित समुदाय में खुशी की लहर

मंदिर के जीर्णोद्धार से कश्मीरी पंडित समुदाय खुशी की लहर है, लेकिन वापसी को लेकर उनके मन में अब भी कुछ आशंकाएं हैं। मंदिर समिति के महासचिव ने कहा कि अधिकतर कश्मीरी पंडित अपने पुराने घर बेच चुके हैं। उसी इलाके में वापस लौटने से नए तनाव पैदा हो सकते हैं।

गौरतलब है कि कश्मीरी पंडित अपनी मातृभूमि लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अब सरकार को उनके सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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